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भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा सवाई माधोपुर द्वारा जिले में ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया गया।

भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा सवाई माधोपुर द्वारा जिले में ‘जन आक्रोश रैली’ का आयोजन किया गया। जिसमें कांग्रेस के खिलाफ जोरदार आक्रोश व्यक्त करते हुए राहुल गांधी का पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम में पूर्व जिलाध्यक्ष श्री सुरेश जैन, डॉ. भरत मथुरिया, जिला मोर्चा प्रभारी श्री जमनालाल वैष्णव, प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती चेतना मीणा, जिला उपाध्यक्ष श्री हरि ओम गर्ग, कार्यालय मंत्री श्री मुकेश शर्मा, प्रवक्ता श्री सुरेंद्र शर्मा, पूर्व जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा श्रीमती संतोष मथुरिया, श्रीमती सावित्री शर्मा, श्रीमती कृष्णा गुप्ता, श्रीमती चंचल गौतम सहित बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही।

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में प्रेस वार्ता

सवाई माधोपुर स्थित भाजपा कार्यालय में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के समर्थन में प्रेस वार्ता को संबोधित किया। लोकसभा में कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दलों द्वारा महिला आरक्षण बिल को रोकने का प्रयास न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है, बल्कि यह देश की नारी शक्ति का सीधा अपमान भी है। 17 अप्रैल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काले दिन के रूप में याद रखा जाएगा, जब महिलाओं के अधिकारों को राजनीतिक स्वार्थ के चलते बाधित किया गया। आज की नारी जागरूक है, सक्षम है और अपने अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करने को तैयार है। पीएम @NarendraModi जी के नेतृत्व में 33% महिला आरक्षण सुनिश्चित करना हमारा संकल्प है और यह संकल्प अडिग है। आने वाला समय नारी शक्ति के उत्थान और सशक्तिकरण का साक्षी बनेगा।

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अब निर्णय-निर्माण में बढ़ेगी भागीदारी: नारी शक्ति वंदन अधिनियम का नया भारत

डॉ. सौम्या गुर्जर: नारी शक्ति वंदन अधिनियम भारत में महिलाओं की निर्णय-निर्माण में भागीदारी बढ़ाएगा और लोकतंत्र को अधिक संतुलित बनाएगा। 2 min read भारत • Rahul Yadav • Veejay Chaudhary • Apr 13, 2026 डॉ सौम्या गुर्जर डॉ सौम्या गुर्जर, महापौर, जयपुर नगर निगम (ग्रेटर) Nari Shakti Vandan Adhiniyam: भारत के लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी कभी शून्य नहीं रही, लेकिन यह लंबे समय तक निर्णायक भी नहीं बन पाई। प्रतिनिधित्व था, पर प्रभाव सीमित रहा और यही वह अंतर था, जिसने नीति-निर्माण को अधूरा रखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी कमी को दूर करने का एक ठोस और आवश्यक प्रयास है। महिला आरक्षण का प्रश्न नया नहीं है। 1996 से यह विषय देश की राजनीति में मौजूद रहा, लेकिन दशकों तक यह सहमति और प्राथमिकता के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाया। वर्ष 2023 में इसे संवैधानिक स्वरूप मिला, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान किया गया। यह केवल एक विधेयक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक ढांचे में एक संरचनात्मक सुधार है। महिला नेतृत्व को मिला नया महत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस अधिनियम को जिस प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया गया, वह यह स्पष्ट करता है कि महिला सशक्तिकरण अब नीति का केंद्र है, न कि केवल एक सामाजिक विमर्श। “महिला-नेतृत्व वाले विकास” की अवधारणा इसी सोच का विस्तार है। भारत में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लंबे समय तक सीमित रहा लोकसभा में लगभग 15% और कई विधानसभाओं में इससे भी कम। यह असंतुलन केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं था; इसने नीति-निर्माण की दिशा को भी प्रभावित किया। जब निर्णय-प्रक्रिया में विविधता सीमित होती है, तो नीतियां भी सीमित दृष्टिकोण के साथ बनती हैं। वैश्विक अनुभव भी यही दर्शाता है कि जहाँ निर्णय-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी अधिक होती है, वहाँ शासन अधिक संतुलित और संवेदनशील होता है। कई यूरोपीय देशों में यह स्पष्ट रूप से देखा गया है। अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि उनकी कम जनसंख्या उनके विकास का मुख्य कारण है यह आंशिक रूप से सही हो सकता है, लेकिन पूर्ण सत्य नहीं। वास्तविक अंतर इस बात से आता है कि निर्णय लेने वालों की सोच कितनी समावेशी है। परिवार से शासन तक नेतृत्व हमारे समाज में यह अनुभव रहा है कि घर की धुरी महिला होती है। वह केवल जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं करती, बल्कि संतुलन और दूरदर्शिता के साथ निर्णयों को दिशा देती है। परिवार के स्तर पर जो नेतृत्व स्वाभाविक रूप से विकसित होता है, वही जब शासन में स्थान पाता है, तो नीतियां अधिक संवेदनशील और समाज के वास्तविक सरोकारों से जुड़ी होती हैं। इस अधिनियम का महत्व केवल सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक प्रभाव निर्णय-निर्माण की प्रकृति में बदलाव के रूप में दिखाई देगा। जब महिलाएं नीति-निर्माण का हिस्सा बनेंगी, तो स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सुरक्षा और बालिकाओं से जुड़े मुद्दे अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आएंगे। पंचायत से संसद तक बढ़ता प्रभाव भारत में पंचायत स्तर पर महिलाओं के आरक्षण ने पहले ही यह सिद्ध किया है कि अवसर मिलने पर नेतृत्व उभरता है और शासन अधिक उत्तरदायी बनता है। यही अनुभव अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने जा रहा है, जहाँ महिलाओं की भागीदारी केवल उपस्थिति नहीं, बल्कि प्रभाव के रूप में दिखाई देगी। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का वास्तविक महत्व आने वाले वर्षों में सामने आएगा, जब यह भारत की नीति-निर्माण प्रक्रिया को अधिक संतुलित और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाएगा। यह केवल सीटों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि नेतृत्व के पुनर्संतुलन की शुरुआत है। जब निर्णय-निर्माण में महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित होगी, तब शासन अधिक संतुलित, संवेदनशील और भविष्य उन्मुख बनेगा और यही किसी भी विकसित राष्ट्र की वास्तविक पहचान है। डॉ सौम्या गुर्जर https://t.co/JbsuMov3eR

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‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’

आज ‘जन आक्रोश महिला सम्मेलन’ में सम्मिलित हुई और नारी शक्ति के साथ एकजुट होकर कांग्रेस के दोहरे चरित्र के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। नारी शक्ति का अपमान और पीएम@narendramodi जी द्वारा लाए गए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का विरोध करने वाली परिवारवादी राजनीति को आने वाले समय में महिलाओं का सशक्त जवाब मिलेगा। नारी शक्ति का आशीर्वाद ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। हम संकल्पबद्ध हैं कि हर बहन-बेटी को उसका मान, सम्मान और अधिकार दिलाकर रहेंगे।

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भगवान श्री परशुराम जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

भगवान परशुराम जी जन्मोत्सव के पावन अवसर पर बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित भव्य पूजन समारोह में सम्मिलित होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान परशुराम जी से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ।

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जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित “अन्वेषण” नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित हुई

जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी में आयोजित “अन्वेषण” नेशनल मीडिया कॉन्फ्रेंस में सम्मिलित हुई और लोकतंत्र में मीडिया की सशक्त व जिम्मेदार भूमिका पर अपने विचार साझा किए। आज के दौर में मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि जनमत निर्माण और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण स्तंभ है। इस अवसर पर लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को रोकने के प्रयासों पर कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों की कड़ी आलोचना की। यह केवल एक विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि देश की करोड़ों महिलाओं के अधिकारों और उनके सशक्त भविष्य के साथ अन्याय है। नारी शक्ति अब जागरूक है, मुखर है और अपने अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है देश की बेटियां इस विरोध को कभी नहीं भूलेंगी और समय आने पर इसका जवाब भी देंगी।

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर ‘सेवायम’ एवं शक्ति वंदन से जुड़ी महिला शक्ति के साथ चाय पर चर्चा…

नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर ‘सेवायम’ एवं शक्ति वंदन से जुड़ी महिला शक्ति के साथ चाय पर चर्चा… Read More »